
डेढ़ सौ साल पुरानी खेरिया हवेली का बड़ा हिस्सा भरभराकर ढहा,

डेढ़ सौ साल पुरानी खेरिया हवेली का बड़ा हिस्सा भरभराकर ढहा, इलाके में मचा हड़कंप रानीगंज। रानीगंज शहर के प्रतिष्ठित तिलक रोड स्थित खेरिया परिवार की करीब डेढ़ सौ वर्ष पुरानी ऐतिहासिक हवेली का मुख्य एवं बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर ढह जाने से इलाके में हड़कंप मच गया। जर्जर हवेली का एक बड़ा भाग गिरने की घटना के बाद आसपास रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई। गनीमत रही कि घटना के समय हवेली के आसपास कोई व्यक्ति नहीं था, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। बताया जाता है कि लंबे समय से जर्जर इस विशाल हवेली की हालत लगातार खराब होती जा रही थी। भवन के बड़े हिस्से के ढहने के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन सक्रिय हुआ। प्रशासन की ओर से अब हवेली के शेष खतरनाक हिस्से को भी सुरक्षित तरीके से गिराने की कवायद शुरू कर दी गई है, ताकि आसपास के लोगों की जान-माल को किसी प्रकार का खतरा न रहे। नगर निगम विभाग के कर्मी, पुलिस प्रशासन एवं स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। हवेली में रहने वाले परिवार के सदस्य राजेश खेरिया ने बताया कि परिवार के अधिकांश लोग यहां से चले गए हैं। कुछ सदस्य देवघर तो कुछ कोलकाता में जाकर बस गए हैं। वर्तमान में परिवार के कुछ सदस्य ही यहां रहकर पापड़ बनाने का काम करते हैं और इसी से अपनी जीविका चलाते हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि इतने बड़े भवन की मरम्मत कराई जा सके। जर्जर स्थिति के कारण यहां रहना भी लगातार मुश्किल होता जा रहा है। स्थानीय प्रशासन द्वारा पूर्व में ही इस भवन को खतरनाक घोषित किया गया था। अब बड़े हिस्से के ढह जाने के बाद प्रशासन के सामने शेष भवन को सुरक्षित तरीके से हटाने की चुनौती है। एक हिस्से के ढहने के बाद दूसरे हिस्सों पर भी दबाव पड़ने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। तिलक रोड पर यह अकेली जर्जर हवेली नहीं है। इस मार्ग पर कई पुरानी हवेलियां और भवन आज भी खतरनाक स्थिति में हैं। पूर्व में इसी सड़क पर गैलरी वाले एक भवन के गिरने से एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। उस घटना के बाद भवन को तोड़कर नया निर्माण कराया गया था। वर्तमान में तिलक रोड की समस्या और गंभीर है। भूगर्भ में धंसान की आशंका के चलते यहां नए भवनों के नक्शे की स्वीकृति और निर्माण कार्य पर लंबे समय से रोक है। ऐसे में पुराने भवनों के मालिक न तो आसानी से उनका पुनर्निर्माण करा पा रहे हैं और न ही जर्जर भवनों में रहना सुरक्षित है। एक हिस्से के गिरने के बाद दूसरे हिस्सों के भी प्रभावित होने की आशंका से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।

रानीगंज चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यकारी सदस्य एवं तिलक रोड निवासी महेश खेरिया ने कहा कि एक समय तिलक रोड दोनों ओर के प्रतिष्ठानों के कारण शहर का प्रमुख व्यवसायिक मार्ग हुआ करता था। लेकिन निर्माण कार्य और नक्शा स्वीकृति पर रोक लगने के बाद यह इलाका धीरे-धीरे वीरान होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को जर्जर भवनों की सुरक्षा के साथ तिलक रोड के भविष्य पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।
