
इकड़ा की सिंधारण नदी पर अतिक्रमण और प्रदूषण का आरोप, कार्रवाई का इंतजार

रानीगंज। कभी इकड़ा तथा आसपास के दर्जनों गांवों के लिए पेयजल, घरेलू उपयोग और सिंचाई का प्रमुख स्रोत रही सिंधारण नदी आज अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से औद्योगिक प्रदूषण, अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता के कारण नदी कई स्थानों पर नाले का रूप ले चुकी है। उनका कहना है कि नदी के संरक्षण के लिए समय-समय पर मांग उठी, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
स्थानीय लोगों के अनुसार सिंधारण नदी केवल जल स्रोत ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी है। मान्यता है कि मां काली के परम भक्त बामाखेपा ने इकड़ा श्मशान के समीप इसी नदी के तट पर काली मंदिर की स्थापना की थी। आज भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि वामपंथी शासनकाल से शुरू हुआ नदी के दोहन का सिलसिला तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में भी जारी रहा। उनका कहना है कि विभिन्न उद्योगों के विस्तार के दौरान नदी की प्राकृतिक धारा से छेड़छाड़ की गई। आरोप है कि फेरोटेक ने सिंधारण नदी के हिस्से में अपना औद्योगिक ढांचा स्थापित किया, जबकि सुपर स्मेल्टर ने संयंत्र विस्तार के दौरान नदी की प्राकृतिक धारा को अपने परिसर के भीतर समेट दिया। इससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ और जलधारा लगातार सिकुड़ती चली गई। स्थानीय स्तर पर श्याम सेल एवं गगन फेरोटेक ‘सहित अन्य उद्योगों पर भी अतिक्रमण के आरोप लगाए जाते रहे हैं।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कारखानों से निकलने वाले प्रदूषित पानी और औद्योगिक अपशिष्ट ने नदी के जल को दूषित कर दिया है, जिससे किसानों, पशुपालकों और आसपास के गांवों के लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
इस मामले के प्रमुखता से सामने आने पर पूर्व में जिला प्रशासन ने जिलाधिकारी, अनुमंडल अधिकारी, बीडीओ, प्रदूषण नियंत्रण विभाग तथा चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों को शामिल कर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति ने निरीक्षण भी किया, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि उसकी सिफारिशों पर प्रभावी अमल नहीं हुआ।
विभिन्न सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों की ओर से मनोज दत्त ने कहा कि समय-समय पर धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन देकर नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा प्रदूषण रोकने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सिंधारण नदी की प्राकृतिक धारा को पुनर्जीवित करने और इसके ऐतिहासिक, धार्मिक तथा पर्यावरणीय महत्व को देखते हुए स्थायी संरक्षण की आवश्यकता है।
इस मुद्दे पर अमृतनगर कोलियरी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में राज्य के मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा था कि यदि किसी उद्योग द्वारा नदी पर अतिक्रमण किया गया है तो उसे हटाया जाएगा और नदी का मूल स्वरूप बहाल किया जाएगा। हालांकि उनके इस बयान के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। ऐसे में क्षेत्र के लोगों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।