
बारिश में बेबस जिंदगी: तिरपाल के नीचे गुजर रही दिव्यांग बुजुर्ग दंपति की रातें
जामुड़िया। बारिश किसी के लिए राहत लेकर आती है, तो किसी की मजबूरियों को और गहरा कर देती है। जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र के चिंचुड़िया निचुपाड़ा में रहने वाले दिव्यांग बुजुर्ग दंपति संध्या बनर्जी (57) और सुभ्रत बनर्जी (67) की जिंदगी इन दिनों ऐसी ही कठिन परीक्षा से गुजर रही है। सिर पर पक्की छत नहीं, घर अधूरा है और लगातार हो रही बारिश में बांस व तिरपाल के सहारे किसी तरह दिन-रात काट रहे हैं।
दोनों पति-पत्नी दिव्यांग हैं। संध्या बनर्जी दृष्टिबाधित हैं, जबकि सुभ्रत बनर्जी सुन नहीं पाते। उम्र और शारीरिक स्थिति के कारण उनके पास आजीविका का कोई साधन भी नहीं है। सरकारी आवास योजना के तहत पहली किस्त के रूप में 60 हजार रुपये मिलने पर उन्होंने पुराना जर्जर मकान तोड़कर नए घर का निर्माण शुरू कराया, लेकिन इसके बाद दूसरी किस्त नहीं मिलने से निर्माण कार्य अधूरा ही रह गया।
अब बरसात के बीच अधबने मकान में तिरपाल डालकर रहना उनकी मजबूरी बन गया है। तेज बारिश होते ही तिरपाल से पानी टपकने लगता है और पूरा घर भीग जाता है। सुरक्षित आश्रय के अभाव में हर बारिश उनके लिए नई चिंता लेकर आती है।
दंपति की बेटी ज्योत्स्ना चक्रवर्ती का कहना है कि मां देख नहीं सकतीं और पिता सुन नहीं पाते। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। मोहल्ले के लोग अपनी क्षमता के अनुसार मदद कर रहे हैं, लेकिन यह सहारा हमेशा नहीं चल सकता।
परिजनों का आरोप है कि संध्या बनर्जी की दिव्यांग पेंशन और सुभ्रत बनर्जी की वृद्धावस्था पेंशन भी पिछले दो-तीन महीनों से बंद है। ऐसे में दोनों का गुजारा पड़ोसियों की मदद और लोगों की दया पर निर्भर हो गया है।
स्थानीय निवासी विश्वजीत बनर्जी ने प्रशासन से आवास योजना की शेष राशि शीघ्र जारी करने और बंद पेंशन शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सहायता नहीं मिली तो बारिश के इस मौसम में बुजुर्ग दंपति की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
मामले पर जामुड़िया के विधायक डॉ. बिजन मुखर्जी ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी मिल चुकी है। उन्होंने बीडीओ को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं और आश्वासन दिया है कि सरकारी नियमों के तहत हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। विधायक ने यह भी कहा कि विधानसभा से लौटने के बाद वह स्वयं दंपति से मिलने जाएंगे।