
सिंडिकेट, कटमनी और वर्चस्व की राजनीति फिर चर्चा में, तापसी रेलवे साइडिंग बना नया केंद्र
रानीगंज। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सिंडिकेट राज, कटमनी, भ्रष्टाचार और सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर जोरदार राजनीतिक लड़ाई लड़ी गई थी। चुनाव में भारी जनसमर्थन मिलने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि क्षेत्र में वर्चस्व की राजनीति और दबंगई पर अंकुश लगेगा, लेकिन चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद ही रानीगंज के तापसी क्षेत्र स्थित रेलवे साइडिंग में वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो जाने से एक बार फिर वही पुराने मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनावी बदलाव के बावजूद जमीनी स्तर पर सिंडिकेट और दखल की राजनीति खत्म होती नहीं दिख रही है।

सूत्रों के अनुसार, तापसी रेलवे साइडिंग में लंबे समय से प्रभाव को लेकर विभिन्न गुट सक्रिय रहे हैं। पहले इस क्षेत्र का संचालन जमुरिया के प्रभावशाली नेता हरेराम सिंह के पुत्र रामपाल सिंह के प्रभाव में माना जाता था। हालांकि विधानसभा चुनाव में हरेराम सिंह की करारी हार के बाद क्षेत्र में उनके खिलाफ लोगों का आक्रोश भी खुलकर सामने आया और चुनाव के बाद से उनके गुट की सक्रियता कम होने की चर्चा है।
इसी बीच साइडिंग क्षेत्र में कर्मियों के साथ मारपीट और हंगामे की घटनाओं ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। अब इस पूरे घटनाक्रम में जयदेव खा का नाम तेजी से उभरकर सामने आ रहा है। बताया जाता है कि अंडाल क्षेत्र के नवनिर्मित रेलवे यार्ड और साइडिंग में भी पहले उनका प्रभाव देखा गया था और अब तापसी क्षेत्र को लेकर गतिविधियां तेज हुई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे साइडिंग से जुड़े कार्यों में करोड़ों रुपये का कारोबार होने के कारण इस क्षेत्र में वर्चस्व की लड़ाई लगातार बढ़ती जा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि चुनाव के दौरान जिन मुद्दों पर जनता ने बदलाव का समर्थन किया था, यदि वही हालात फिर उभरने लगे तो यह नई व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
अब सभी की निगाह प्रशासन पर टिकी है कि वह इस पूरे मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और क्षेत्र में कानून व्यवस्था एवं सामान्य माहौल बहाल करने के लिए क्या कदम उठाता है।