
रानीगंज, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होते ही तापसी रेलवे साइडिंग क्षेत्र एक बार फिर बाहुबलियों और सिंडिकेट को लेकर चर्चा में आ गया। आरोप है कि चुनाव परिणाम आने की रात लोडिंग-अनलोडिंग को लेकर जमकर शक्ति प्रदर्शन और दबंगई हुई, जिससे वहां पहले से काम कर रहे कई तृणमूल समर्थक कर्मियों को मैदान छोड़कर भागना पड़ा था।
हालांकि फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि शुरुआती दौर में उन्हें लगा था कि सत्ता परिवर्तन के बाद व्यवस्था में सुधार आएगा और वर्षों से चले आ रहे सिंडिकेट राज पर रोक लगेगी, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर पुरानी स्थिति लौट आई। आरोप है कि पुराने ट्रांसपोर्टरों और बाहुबलियों के साथ मिलकर फिर से साइडिंग में लोडिंग-अनलोडिंग और ट्रांसपोर्टिंग का काम शुरू कर दिया गया है।
फैक्ट्री मालिकों का आरोप है कि अब मिलीभगत से नया सिंडिकेट तैयार हो गया है, जिसका सीधा नुकसान उद्योगों को उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि साइडिंग में फैक्ट्री का माल आने पर उसकी लोडिंग, अनलोडिंग और ट्रांसपोर्टिंग की जिम्मेदारी फैक्ट्री प्रबंधन की होती है, लेकिन दबाव बनाकर उनसे तय लोगों के पेलोडर, सामग्री और मजदूर लेने को मजबूर किया जाता है। इससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
फैक्ट्री मालिकों ने कहा कि बीजेपी सरकार बनने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि वर्षों से चले आ रहे सिंडिकेट सिस्टम का अंत होगा। पहले वाम समर्थित समूहों का प्रभाव था, बाद में तृणमूल समर्थित सिंडिकेट हावी हो गया, और अब वर्तमान सरकार के दौरान भी हालात में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा। उनका आरोप है कि अब नई परिस्थितियों में मिलीभगत के जरिए फिर सिंडिकेट राज कायम हो गया है, जिससे उद्योगों को कोई राहत नहीं मिल रही।
हालांकि क्षेत्र की प्रभावी विधायक व मंत्री अग्निमित्रा पाल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि राज्य में सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम करेगी और किसी भी प्रकार का सिंडिकेट, कटमनी या अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बावजूद तापसी रेलवे साइडिंग को लेकर उठ रहे आरोपों ने स्थानीय उद्योग जगत में एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
