, रामकथा की प्रासंगिकता पर रहा विशेष जोर

रानीगंज। संस्कार फाउंडेशन रानीगंज के तत्वावधान में आयोजित संगीतामय रामकथा का सफलता पूर्वक हुआ। कथा के माध्यम से वक्ता ने वर्तमान समय में भगवान श्रीराम के आदर्शों की प्रासंगिकता को सरल, सरस और भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। श्रद्धालु पूरे आयोजन के दौरान भक्ति-रस में सराबोर नजर आए।

कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों ने वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया। “भवानी सुनली राम कहानी” जैसे भावपूर्ण भजनों के संकलित गायन ने श्रोताओं को विशेष रूप से भावुक कर दिया। रामकथा के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि मर्यादा, करुणा और कर्तव्य का मार्ग ही समाज को सही दिशा देता है। “न पिता का बचन” जैसे प्रसंगों के जरिए जीवन-मूल्यों पर भी सार्थक प्रकाश डाला गया।

अपने-अपने राम के संदर्भ में वक्ता ने कहा कि बंगाल की धरती को शक्ति की भूमि माना जाता है और यहां की संस्कृति, सभ्यता एवं भाषा स्वयं में आदर्श हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय था जब देश में आने वाले मेहमानों को ताजमहल दिखाया जाता था, लेकिन यदि प्रेम और समर्पण का सजीव उदाहरण दिखाना हो तो रामेश्वरम का रामसेतु दिखाया जाना चाहिए, जिसे माता सीता के लिए बनाया गया था। इसी क्रम में उन्होंने बिहार के दशरथ मांझी की प्रेम और संघर्ष से भरी जीवनगाथा को भी अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया, जिसने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों की ओर से सभी श्रद्धालुओं, कलाकारों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।