पौष माह में बन देवता की पूजा व बन भोज मिलन समारोह संपन्न

रानीगंज । भूखल मल, मधु चक बाबा गरेरी ( भगत ) समाज की ओर से पौष माह के अवसर पर बन देवता के बरदही में इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ पूजा-अर्चना एवं बन भोज मिलन समारोह का आयोजन किया गया।
भेड़ के कारोबारी बबलू भगत ने बताया कि वर्ष 1994 तक यह मंदिर बसरा मोड़ के पास स्थित था, लेकिन सड़क निर्माण के दौरान इसे वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित किया गया। बताया जाता है कि सड़क निर्माण कार्य में बार-बार आ रही बाधाओं के बीच ठेकेदारों द्वारा आपसी सहमति से इस स्थल पर मंदिर की स्थापना की गई।
गोवर्धन भगत ने कहा कि पहले इस इलाके के लोग रोजगार और परिवार के भरण-पोषण के लिए भेड़ चराने का काम करते थे। हजारों की संख्या में लोग भेड़ लेकर जंगलों में सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर तक जाते और फिर वापस लौटते थे। इस कठिन यात्रा के दौरान कई तरह की आपदाएं आती थीं, लेकिन आज तक ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जब किसी की जान गई हो। मान्यता है कि बाबा स्वयं सबकी रक्षा करते हैं, इसी परंपरा के अनुसार आज भी पूजा-अर्चना की जाती है।
इस क्षेत्र के पार्षद देवेंद्र भगत ने कहा कि यहां जन्म-जन्मांतर से पूजा होती आ रही है और परंपरा आज भी जीवित है। स्थानीय निवासी उत्तम भगत ने बताया कि पहले लगभग हर घर में सैकड़ों की संख्या में भेड़ हुआ करती थीं, उसकी उल से कमल , गर्म कपड़े का करघे हुआ करता था लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और मजबूरीवश लोग अन्य कामकाज में लग गए। हजारों लोग इस लगी लघु उद्योग में शामिलथ आज लुप्त होगया है।
पूर्व सैनिक अजीत कुमार भगत ने कहा कि वर्तमान समय में युवा वर्ग इस परंपरागत कार्य से दूर हो गया है। इस मोहल्ले के कई युवक सेना और अन्य पेशों में चले गए हैं। कभी यहां घर-घर में बुनकर और कमल का काम प्रसिद्ध था, लेकिन आज वह भी लगभग बंद हो चुका है और गिने-चुने घरों में ही यह कार्य बचा है।
हालांकि, सभी ने इस बात पर संतोष जताया कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के माध्यम से लोग एकजुट होते हैं और प्रयास रहता है कि पर्व के अवसर पर सभी मिलकर परंपरा का निर्वाह करें।