रानीगंज में ‘अपने-अपने राम’ कथा का भावपूर्ण समापन

रानीगंज। प्रसिद्ध कवि एवं कथावाचक डॉ. कुमार विश्वास की तीन दिवसीय ऐतिहासिक कार्यक्रम अपने-अपने राम रामकथा का समापन आज रानीगंज में नित्य संगीत और भजन के साथ बड़े ही उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। कथा के समापन अवसर पर संस्कार फाउंडेशन की ओर से डॉ. कुमार विश्वास को भाव-विभोर शब्दों में विदाई दी गई तथा उन्हें स्मृति-पत्र एवं सम्मान-पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

आज की कथा में डॉ. कुमार विश्वास ने केवट प्रसंग को अत्यंत भावनात्मक और प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया। गंगा पार कराने के बाद उतराई के बदले केवट का यह कथन कि “हम दोनों का काम एक ही है, मैं गंगा पार कराता हूं और आप भवसागर पार करते हैं,” श्रोताओं को गहराई से छू गया।
हनुमान जी के चरित्र वर्णन में उन्होंने बताया कि युद्ध समाप्ति के बाद जब सभी लौट गए, तब भी हनुमान वहीं रह गए। प्रभु राम द्वारा कुछ मांगने पर हनुमान का उत्तर—“सबको आपने एक-एक पद दिया है, मुझे दो पद चाहिए, आपके दोनों चरण”—ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।

अंगद प्रसंग में उन्होंने लंका में रावण के समक्ष अंगद के आत्मविश्वास और बल का वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार अंगद ने अपने पिता बालि की वीरता का उल्लेख कर रावण का मनोबल तोड़ दिया।

डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि हनुमान और रामायण की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है। उन्होंने वर्तमान भारत की शक्ति और सामर्थ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी देश में हनुमान स्वरूप मौजूद हैं। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने समाज को संदेश दिया कि यह सोच बदलनी होगी कि पुत्र ही बुढ़ापे का सहारा होता है, क्योंकि आज बेटियां हर क्षेत्र में आगे हैं। उन्होंने जोगी बाबा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए इस विचार को और स्पष्ट किया।
